क्या आपको पता है की इनकम टैक्स क्या होता है (Income Tax in Hindi). Income Tax एक ऐसा टैक्स यानि की कर होता है जिसे आप और हमसे हर साल भारत सरकार द्वारा लिया जाता है मतलब की वसूला जाता है! अक्सर हम इनकम टैक्स बारे में TV Channels और अखबारों में पढ़ते रहते हैं! आज के इस हिंदी आर्टिकल में हम जानने वाले है की आखिर Income Tax Kya Hai, इनकम टैक्स कब और कैसे जमा करना होता है और इसे कैसे कैलकुलेट किया जाता है (Calculation of Income Tax in Hindi)

अपने देखा होगा की हर एक बजट में भारत सरकार Income Tax के बारे में संसद में बात करती है! और सरकार द्वारा कभी Income Tax के Slabs को बढ़ा दिया जाता है तो कभी घटा दिया जाता है! इन सभी Slabs में अलग अलग Incomes को बाँट दिया जाता है!

आज के इस हिंदी लेख को पूरा पढ़े ताकि आप Income Tax के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सके! जैसे – Income Tax क्या है, इनकम टैक्स में कितने प्रकार के स्लेब होते हैं और Income Tax को कैसे कैलकुलेट किया जाता है!

Income Tax Kya hai

[ Income Tax Kya Hai – Calculation of Income Tax in Hindi ]

विषय - सूची

इनकम टैक्स क्या है – What is Income Tax in Hindi

Income Tax प्रत्येक व्यक्ति की आमदनी यानी की Income पर लगने वाला Tax (कर) होता है! यह Tax हर वर्ष भारत सरकार द्वारा लिया जाता है मतलब की हमें साल में एक बार अपने कमाई का कुछ हिस्सा भारत सरकार को देना होता है! 

दरअसल Income Tax आपके द्वारा साल भर में कमाई गयी वित्तीय आय पर लागु होती है जिसका मतबल यह होता है की किसी को कम टैक्स तो किसी को अधिक टैक्स देना होता है!

आपको बता दे सनं 1860 में अंग्रेजो ने सबसे पहले बजट को पेश किया! और उसी बजट में पहली बार Income Tax (आयकर) को शामिल गया था!

तब जो व्यक्ति 200 रूपये तक की सालाना कमाई करता था उसे इनकम टैक्स से बाहर रखा जाता था! Income Tax को सही समय पर पे करना प्रत्येक व्यक्ति विशेष और बिज़नेस का उत्तरदायित्व होता है! 

इनकम टैक्स सरकार का एक मुख्य आय स्रोत होता है ताकि देश की अर्थव्यवस्था चल सके! इसलिये हर साल Income Tax File करना जरूरी होता है! 

Income Tax के पैसे का उपयोग भारत सरकार द्वारा देश के विकास कार्यो और जन सुविधाओं के लिये किया जाता है!

भारत के संविधान में Income Tax, आयकर अधिनियम 1961 और आयकर अधिनियम 1962 के अंतर्गत निहित है! इसी अधिनियम के अंतर्गत कई ऐसी भी सुविधाएँ निहित हैं जिनसे अलग अलग आय दर पर Income Tax में छूट मिलती है! 

Income Tax देने के लिए आय की अलग अलग सीमायें निर्धारित की गयी हैं! आय जितनी अधिक बढ़ती जायेगी तो Income Tax का Slab भी वर्तमान आय के आधार पर बढ़ता जाएगा!

वित्तीय वर्ष 2020-2021 में Income Tax स्लैब क्या है?

आय कर देने की एक मुख्य सीमा बनायीं गयी है! इस सीमा से ऊपर कोई भी व्यक्तिगत आय या फिर किसी संस्थान की आय जाती है तो उन पर यह Slabs लागू होता है!

S.NoTaxable IncomeTaxable Rate (%)
1.2.5 लाख तकशून्य 
2.2,50,001 से 5 लाख तक धारा 87 A के तहत ₹12,500 कर छूट के साथ आपकी कर योग्य आय पर 5% आयकर! 
3.5 लाख 1 रूपये से 7.50 लाख तक10 %
4.7, 50, 001 से 10 लाख तक15 %
5.10 लाख 1 रूपये से 12.50 लाख तक20 %
6.12, 50,001 रूपये से 15 लाख तक 25 %
7.15 लाख 1 रूपये से ऊपर30 %
Income Tax Slabs

वित्तीय वर्ष 2019 – 2020 में आय कर देने की शुरुआत 2. 5 लाख से शुरू थी! किन्तु इस वर्ष के बाद इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया! इसी वर्ष सभी Slabs में बदलाव किये गए थे! 5 लाख से शुरुआत होने से मध्यम वर्ग के लोगों को बहुत राहत मिली थी! यहां पर Section 87 A को लागू कर दिया जाता है जिससे कर्मचारी को 2.5 लाख से लेकर 5 लाख तक के बीच में छूट मिल जाती है!

वरिष्ठ नागरिको के लिए वित्तीय वर्ष 2019 – 2020 में आयकर देने की लिमिट को 3 लाख किया गया! 2021 वर्ष में 1 फरवरी में पेश किये गए बजट में केंद्र सरकार द्वारा 75 साल के ऊपर के लोगों को किसी भी प्रकार का आयकर ना देने की बात कही है!

साझेदारी फर्म (Partnership Farm ) – कोई भी साझेदारी फर्म 30 % कर देने के अंतर्गत आती है और उन पर अधिभार कर लगाया जाता है! यदि उस फर्म की आय 1 करोड़ से अधिक है तो अधिभार कर कुल आयकर का 12 प्रतिशत देना होता है!

स्थानीय प्राधिकरण (Local Authority) – स्थानीय प्राधिकरण 30 % के आयकर के दायरे में आते हैं! इन पर भी सारचार्ज यानि अधिभार कर लगाया जाता है! जो 1 करोड़ से अधिक आय पर कुल आयकर का 12 प्रतिशत होता है!

आयकर कितने प्रकार के होते हैं – Types Of Income Tax in Hindi

आयकर किसी भी वित्तीय संस्थान से अलग अलग रूप में लिया जाता है जैसे कोई व्यवसाय कर रहे हैं तो आय के अनुसार जो आयकर भरने के Slabs बने होते हैं उस हिसाब से Income Tax File करते हैं! कोई व्यक्ति नौकरी कर रहे हैं तो अपने Slabs के अनुसार Income Tax File करते हैं!

इस तरह सरकार के आयकर के स्रोत अलग अलग प्रकार के हो सकते हैं! कुछ मुख्य Income Tax Types के बारे में हम जाने लेते हैं –

  • किसी भी तरह के वेतन के रूप में आय (Salary Income Tax)
  • व्यवसाय से मिलने वाला आयकर
  • अचल संपत्ति से आने वाले आय पर
  • शेयर मार्केट से होने वाली आय पर Income Tax
  • बैंक डिपॉजिट्स और बांड्स पर मिलने वाले ब्याज से आने वाली आय

वेतन से मिलने वाला Income Tax

किसी भी कर्मचारी की आय पर लगने वाला कर Income Tax का एक मुख्य स्रोत है! इसमें कई तरह के फंड शामिल हैं जैसे पेंशन, ग्रेज्युटी,प्रोविडेड फंड, कमीशन, फीस इत्यादि! कर्मचारियों को किस वेतन पर कितना आयकर देना होता है! यह Income Tax Slabs पर निर्भर करता है!

व्यवसाय से मिलने वाला Income Tax

इसमें किसी किसी भी व्यवसाय, साझा कारोबार और मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज के होने वाली कमाई के आधार पर आयकर भरा जाता है! किसी भी कारोबार में मिलने वाले सभी अतिरिक्त कमाई जैसे Bonus, Commission इत्यादि सभी कारोबार से होने वाली आय के अंतर्गत आती है! अधिकतर संस्थाएं आयकर के 30 प्रतिशत से ऊपर के Slabs में आती है!

अचल संपत्ति से आने वाले आय पर Income Tax

किसी भी मकान के किराये, दूकान के किराये या फिर किसी भी तरह के प्लाट पर कार्यरत मशीनों से आने वाले किराये के रूप में जो भी आय शामिल होती हैं वह अचल सम्पति से होने वाली आय के रूप में होती है! कोई जमीन लीज पर दी हो वह भी एक आय का स्रोत है!

शेयर मार्केट से होने वाली आय पर Income Tax

जब भी कोई व्यक्ति या बड़ी कम्पनी शेयर बाजार में अधिक निवेश करती है तो स्वाभाविक है उन्हें Dividend Amount भी अधिक मिलता है! इसी Dividend Amount से जो आय हो रही है उस पर Income Tax Slabs के अनुसार सरकार आयकर लगाती है!

Bank Deposits और Bonds के ब्याज से आने वाली आय पर Income Tax

कई लोग Bonds पर बहुत अधिक Investment करते हैं जिससे उन्हें Return Amount भी बहुत अधिक मिलता है! एक तरह से वह भी किसी का आय का साधन है! Bank Deposits जैसे एफडी या आरडी या अन्य सुविधा जिससे हमें बैंक द्वारा ब्याज मिलता है! ये सभी आयकर हैं जो Income Tax को Generate करने का मुख्य स्रोत है!

और भी अन्य कई ऐसे संस्थान या फिर ऐसे Department हैं जिनसे सरकार आयकर लेती है! जैसे लॉटरी, रायल्टी से निकलने वाली आय या फिर किसी रेस से अर्जित होने वाली आय! ये सभी Income tax के प्रकार भी हैं और एक स्रोत भी हैं जिनसे होने वाली आय से हम आयकर भरते हैं!

सरकार आयकर क्यों लेती है – Why Government Collect Income Tax

अक्सर यह प्रश्न हर बार पूछा जाता है क्योंकि नौकरी करने वाले लोग यही सोचते है कि नौकरी हम कर रहे हैं और हम क्यों सरकार को टैक्स दें! इसका एक सीधा सा जवाब है सरकार इस इनकम टैक्स के पैसे को अधिकार क्षेत्र में रहने वाले लोगों, स्थापित संस्थाओं को सुविधाएँ उपलब्ध कराती है! जैसे सड़क की सुविधा, अस्पतालों की व्यवस्था, बिजली, पानी और भी अन्य सेवाएं जिसमें शामिल होती हैं!

इन कार्यों को करने के लिए सरकार Income Tax वसूलती है! यह प्रणाली सिर्फ भारत में ही नहीं है जबकि यह कर प्रणाली दुनिया के अन्य सभी देशों में है! कई लोग इससे बचना चाहते हैं जो गलत माना जाता है!

किसी भी कार्य को हम अगर पूरी योजना बनाकर करें तो उसके परिणाम अच्छे ही होते हैं उसी तरह Income Tax की प्रणाली में भी है!

आयकर कैसे कैलकुलेट करते है – Calculation of Income Tax in Hindi

इनकम टैक्स का कैलकुलेशन करने के लिए सबसे पहले आपको Income Tax के Slabs को समझना बहुत ही जरूरी है! इसके साथ ही कई ऐसी Saving Schemes भी हैं जिनका फायदा हम ले सकते हैं! 

आप जितना वेतन लेते हैं या आपकी जितनी आय है उसको Slabs के अनुसार मिलाकर देखिये! अगर आप Income Tax देने की लिमिट को पार करते हैं तो आप Tax Rebate वाली सभी Schemes का Benefits ले सकते हैं!

Online भी आप बड़ी आसानी से Income Tax का calculation कर सकते हैं! इसके लिए आयकर विभाग ने E Calculator भी जारी की है जिसे आप Income Tax Department की website पर देख सकते हैं!

आयकर में छूट – Income Tax Exemption in Hindi

Income Tax को Slabs के अनुसार कैलकुलेट किया जाता है! तो आइये जान लेते हैं Income Tax Calculation के अंतर्गत आने वाली ऐसी कौन सी सुविधाएँ हैं या कहें की ऐसे कौन से निवेश हैं जिनका हमें Benefits मिलता है!

  1. Section 80 (C)
  2. Section 80 (D)
  3. Section 80 (E)
  4. Section 80 (DD)
  5. PPF Account
  6. दो बच्चों की ट्युशन फीस
  7. पेंशन योजना
  8. Fix Deposit

हमें मिलने वाले वेतन में हम Section 80 (c) के अंतर्गत 1.5 लाख तक का निवेश कर सकते हैं! यह निवेश आप किसी भी Mutual Fund, Insurance, Post Office Saving Schemes में लगा सकते हैं! 

2. Section 80 (D)

यहाँ तक आप सालाना 25000 तक स्वास्थ संबंधी बीमाओं में निवेश कर सकते हैं! और 60 साल के ऊपर के लोगों के लिए यह 30000 रूपये है! 

3. Section 80 (E)

अगर कोई भी Education Loan लिया गया है तो आपको इसमें करीब 8 साल तक Income tax में छूट मिल जाएगी! 

4. Section 80 (DD)

जब भी कोई विकलांग व्यक्ति आप पर निर्भर है तो हम उसके स्वास्थ के लिए जो भी बीमा खरीदेंगे उसका फायदा हम Section 80 (DD) के अंतर्गत हमें मिलता है! 

5. PPF Account

यह Account किसी भी पोस्ट ऑफिस या किसी सरकारी बैंक में आप खुलवा सकते हैं! इस पर आपको कोई भी आयकर नहीं देना होता है! यहाँ पर आप सालाना 1 लाख 20 हजार तक जमा कर सकते हैं!

6. दो बच्चों की ट्युशन फीस

आप अपने दो बच्चों की ट्युशन फीस का दावा करके Income Tax में छूट ले सकते हैं! किन्तु इसके लिए आपने जो भी फीस दी है वो भारत के ही किसी ही शिक्षण संस्थान को दी जानी चाहिए! यह छूट Section 80 (c) के अंतर्गत निहित है!

7. पेंशन योजना

आप किसी भी बीमा कम्पनी से पेंशन प्लान ले सकते हैं! यह 1.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए! Section 80 (c) और Section 80 (ccc) के अंतर्गत यह लाभ आप ले सकते हैं!

8. Fix Deposit

कोई भी कर्मचारी आयकर से बचने के लिए Fix Deposit में निवेश कर सकते हैं! Fix Deposit का समय 5 साल होता है! किन्तु इस Fix Deposit में मिलने वाले ब्याज पर Income Tax लगता है!

तो ऐसी अन्य और कई Schemes हैं जिनका फायदा आप ले सकते हैं, जैसे घर के लिए लिया हुआ लोन (Home Loan), Term Life Insurance Plan, अटल पेंशन योजना, Section 80 (CCD) (1) के तहत 1.5 लाख तक का निवेश इत्यादि!

इसे भी पढ़े: सीए कैसे बनते है? – पूरी जानकारी

इनकम टैक्स जमा कैसे करें – How to Pay Income Tax In Hindi

कोई भी कर्मचारी का वेतन या उनकी कमाई अगर Income Tax के दायरे में आती है तो उन्हें Slabs के अनुसार आयकर देना होता है!

आयकर का भुगतान करने के मुख्य तीन तरीके होते हैं!

टीडीएस (TDS)

TDS का Full Form Tax Deduction Source होता हैं! जिसका हिंदी में अर्थ किसी भी आय के स्रोत पर कर कटौती होता है! अगर आप मासिक वेतन लेते हैं तो जिस कम्पनी के द्वारा आपको वेतन मिलता है वह आपको Income Tax यानि टीडीएस Deduct करने के बाद जो भी आपका वेतन बनता है वह आपको देती है!  

और जो कट किया हुआ टीडीएस है उसे Income Tax Department में जमा करा देती है! यह तिमाही जमा होता है! आप अपने TDS Statement कम्पनी से ले सकते हैं! आप इसे तय तारीख पर खुद भी जमा कर सकते हैं जो की हर तिमाही होती है!  

अग्रिम कर (Advance Tax)

किसी भी आय पर अगर सालाना इनकम टैक्स 10 हजार से अधिक बनता है तो कारोबारी को यह हर तिमाही जमा करना होता है! यह कुल टैक्स का कुछ प्रतिशत हिस्सा होता है! 

सेल्फ एसेसमेंट टैक्स (Self Assessment Tax)

टीडीएस कर के जमा कराये जाने के बाद अगर किसी कर में कमी होने पर जो टैक्स दिया जाता है उसे सेल्फ एसेसमेंट टैक्स कहते हैं! यह टैक्स अगर कुछ आयकर में देनदारी बची तो ही भरा जाता है!  

अगर आप आयकर के किसी भी दायरे में आते हैं तो आपको Income Tax जरूर देना चाहिए! आप अन्य Schemes (Section 80 (c), Section 80(d), Section 80 (e). Section 80(dd), पेंशन योजना इत्यादि का फायदा भी जरूर लें! यह आपका हक़ है, किन्तु Slabs के आधार पर आयकर जरूर भरें! 

इन्हें भी पढ़ें!

निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस हिंदी लेख में हमने Income Tax क्या है (Income Tax in India) और इनकम टैक्स में कितने प्रकार के Slabs होते हैं – Slabs of Income Tax in Hindi, आयकर कितने प्रकार के होते हैं – Types Of Income Tax in Hindi, Income Tax Calculator in India, के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की! साथ ही हमने इनकम टैक्स का भुगतान कैसे करें, के बारे में भी जाना!

उम्मीद है आपको इस आर्टिकल से Income Tax और Calculation of Income Tax in Hindi के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा! अगर आपके पास इस पोस्ट से संबधित किसी प्रकार का कोई प्रश्न या सुझाव हो तो हमें कमेंट सेक्शन में कमेंट करके जरूर बताये! और पोस्ट को सोशल मिडिया (WhatsApp, Facebook, Instagram, twitter Etc.) पर जरूर शेयर कीजिये!

इस लेख को पूरा पढ़ने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद!

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2 COMMENTS

    • Hi Ravi, Google Adsense से होने वाली Earning पर भी इनकम टैक्स देना होता है! यह तो आप पोस्ट को पढ़कर समझ गए होंगे की आपको इनकम टैक्स आपके साल भर के कमाई का देना होता है! वैसे ही आपको अपने Google Adsense से होने वाली साल भर की Earning पर इनकम टैक्स देना होता है!

      पोस्ट पढ़ने और कमेंट करने के लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

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