नमस्कार दोस्तों, कुछ समय से हमारे देश में लगातार किसान आंदोलन हो रहे है! और अलग अलग राज्यो से किसान सड़को में उतरकर देश की राजधानी और लालकिले के प्राचीर तक पहुंच चुके है! किसान भारत सरकार द्वारा किसानो के लिये बनाये गये एक नये क़ानून जिसमे MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को समाप्त किया जा रहा है! का विरोध कर रहे है!

दूसरी ओर सरकार की सुने तो इस नये कानून से MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर कोई असर नहीं होगा! इसलिए आज के इस लेख में हम MSP क्या है और इसका पूरा नाम क्या है (MSP Full Form in Hindi) विस्तार से जानने वाले है!

एमएसपी सरकार द्वारा किसान की फसल के लिए निर्धारित एक न्यूनतम मूल्य होता है! दरअसल सरकार किसान को उसकी फसल के लिए MSP मूल्य के रूप में यह गारंटी देती है की उसकी फसल निर्धारित मूल्य पर खरीदी जाएगी!

वर्तमान समय में हमारे देश में सरकार द्वारा किस फसल पर कितना MSP किसानों को दिया जाता है! (MSP Price List in Hindi 2020-21) और नया कृषि बिल क्या है? (Naye krishi bill Meaning kya hai) जानने वाले है! तो इस आर्टिकल में बने रहिये हमारे साथ!

इस पोस्ट में हम MSP Kya Hai के साथ साथ MSP से संबधित सभी सवालों जैसे MSP की शुरुआत कब हुई?, MSP कौन तय करता है?

msp kya hai in Hindi
MSP Full Form in Hindi

एमएसपी फुल फॉर्म – MSP Full Form in Hindi

MSP Full Form in Hindi: एमएसपी का फुल फॉर्म Minimum Support Price होता है! किसी भी फसल को किसान से Minimum Support Price से कम Price में नहीं खरीदा जा सकता है! किसी भी फसलों के दाम में गिरावट के समय यह एक समर्थन मूल्य होता है! 

एमएसपी का हिंदी मीनिंग क्या है – MSP Meaning in Hindi

Hindi Meaning of MSP: MSP का हिंदी में Meaning न्यूनतम समर्थन मूल्य होता है! Market में किसी भी फसल का मूल्य चाहे कितना ही गिर जाये किन्तु किसान को उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता ही है जो भारत सरकार द्वारा तय किया जाता है! 

एमएसपी क्या है – MSP Kya Hai in Hindi 

MSP Kya Hai: वह निर्धारित न्यूनतम मूल्य जिस पर Central Government की FCI (Food Corporation of India Agency) किसानों से फसलों को खरीदती है! उसे MSP (Minimum Support Price) मतलब न्यूनतम समर्थन मूल्य कहते है! आपको बता दे, इस निर्धारित मूल्य (MSP) से कम दाम पर किसानों से कोई भी फसल नहीं खरीदी जा सकती है! 

इस मूल्य को भारत सरकार तय करती है! सरकार किसानों को इस न्यूनतम मूल्य फसलों को खरीदने की गारंटी भी देती है! British Government के दौरान इस तरह की प्रणाली को शुरू किया गया था! यह फसल की लागत को तय करने का एक पैमाना भी होता है! 

जैसा कि आप सब जानते होंगे आजकल देश के किसान संगठनों द्वारा इसी एमएसपी पर कानून बनाने की मांग सरकार से की जा रही है! सरकार देश भर में जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुंचाने के लिए MSP (Minimum Support Price) पर किसानों से अनाज खरीदती है! 

आइये एक उदाहरण के तौर पर समझते हैं 

माना गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार ने 2000 प्रति कुंतल रखा है! जब भी किसान के पास कोई खरीददार आएगा या किसान अपनी फसल बेचेगा तो वह 2000 प्रति कुंतल ही बेचेगा! खरीदने वाला भी इसी रेट पर खरीदेगा! यह मूल्य गुणवत्ता के आधार पर बढ़ाया जा सकता है किन्तु घटाया नहीं जा सकता! 

एमएसपी की शुरुआत कब हुई  – MSP ki Shuruaat kab hui

26 दिसंबर 1964 को MSP को मंजूरी दी गयी थी! किन्तु इसी वर्ष इसको लागु नहीं किया गया! इसके अगले वर्ष यानि 1965 में MSP को उस वक्त भारत सरकार के सचिव के पद पर रहे बी शिवरामन ने उस पर अंतिम मुहर लगा दी! 

इसके बाद 1967 में पहली बार गेंहू की एमएसपी घोषित की गयी! यहाँ से हर वर्ष MSP की घोषणा होने लगी! 

MSP कौन निर्धारित करता है – MSP kaun nirdharit karta hai

सरकार द्वारा दी जाने वाली एमएसपी CACP (Commission for Agriculture Cost and Prices) सरकारी Agency द्वारा निर्धारित की जाती है! इसे हिंदी में कृषि लागत एंव मूल्य आयोग कहा जाता है! 

यानि हम कह सकते हैं की सरकार CACP के मूल्य तय करने के बाद MSP (Minimum Support Price) जारी करती है! 

पहले इस आयोग को कृषि मूल्य आयोग के नाम से जाना जाता था! CACP की शुरुआत 1965 में की गयी थी! वर्तमान समय में इसमें एक अध्यक्ष, एक सदस्य आधिकारिक तौर पर, दो सदस्य गैर आधिकारिक तौर पर होते हैं!

इस समीति में एक सचिव पद को भी शामिल किया गया है! 

एमएसपी का निर्धारण कैसे किया जाता है – MSP ka nirdharan kaise hota hai

  • हमारे देश के अलग अलग राज्यों में किस तरह की फसल होती है? कितने जगह में होती है? कितने हेक्टेयर में फसल होती है! इसके अनुसार MSP का निर्धारण किया जाता है! 
  • बाजार में मूल्य और फसल पर कुल लागत के अनुसार निर्धारित! 
  • देश की जनसख्या और प्रत्येक परिवार की खपत के अनुसार MSP (Minimum Support Price) निर्धारित!
  • प्रत्येक फसल की बुआई से लेकर कटाई तक होने वाले खर्च पर भी MSP निर्भर करता है! 
  • मांग, आपूर्ति व बाजार की कीमतों का रुझान!  
  • अनाजों के भंडारण, लाने ले जाने पर खर्च, टैक्स, मंडियों का टैक्स, फायदों और नुक्सान के अनुसार निर्धारित! 
  • सरकारी और सार्वजनिक एजेंसियों जैसे FCI (Food Corporation of India) और NAFED (National Agriculture Cooperative Marketing Federation) की Storage Capacity पर भी MSP निर्भर करता है!

कौन सी फसलों पर एमएसपी दिया जाता है? 

CACP (Commission for Agriculture Cost and Prices) की सिफारिशों के आधार पर वर्तमान समय में भारत सरकार द्वारा कुल 22 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है!

इनमें 6 रबी फसलें, 14 खरीब फसलें, 2 वाणिज्यिक फसलें शामिल हैं! 

  • इन फसलों में 7 तरह के अनाज शामिल हैं जैसे गेहूं, धान, बाजरा, जौ, ज्वार, रागी, और मक्का!
  • 5 दलहन की फसलें जैसे अरहर, चना, उड़द, मूंग, और मसूर है!
  • तिलहन की 8 फसलें जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तोरिया, तिल, केसर बीज, सूरजमुखी के बीज, और रामतिल शामिल हैं! 

क्या नए कृषि कानूनों का संबंध एमएसपी से है?

वर्तमान समय में देश भर में नए कानूनों को वापस लेने को लेकर कई जगहों पर किसान आंदोलन कर रहे हैं! कई किसान यह समझ रहे हैं कि नए कानून के लागु होने के बाद एमएसपी खत्म हो जाएगी!

इस बात को जानने से यह सवाल उठता है कि क्या नए कानून लागु होने के बाद एमएसपी खत्म हो जायगी? 

इसका सीधा उत्तर है नहीं, दोस्तों इस नए बिल में एमएसपी का कहीं पर कोई भी जिक्र नहीं है! एमएसपी आजादी के समय से मिलती आ रही है और आगे भी मिलती रहेगी! भारत सरकार ने यह लिखित में भी किसानों को सौंपा है! 

तीन नए कृषि कानून क्या हैं – Naye krishi bill kya hai

दोस्तों हम यहां पर भारत सरकार द्वारा संसद में पारित नए कृषि कानूनों की जानकारी संक्षेप में दे रहे हैं – 

पहला बिल – केंद्र सरकार ने इस बिल में किसानों को अपनी फसल देश भर  में कहीं भी बेचने की छूट दी है!  किसान चाहे अपनी फसल को अपने क्षेत्र में बेचे या दूसरे क्षेत्र में यह उस पर निर्भर करता है! 

एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच कारोबार बढ़ाने पर जोर इस बिल में दिया गया है! Marketing और Transportation पर ख़र्च कम करने का प्रावधान है! 

दूसरा बिल – इस बिल में सरकार ने कृषि करारों को राष्ट्रीय रूप दिया है! यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं, एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करता है! 

यानि किसानो को छूट है कि वो किसी भी कंपनी से Strong Agreement के साथ अपनी फसलों का सौदा तय कर सकते हैं! 

इसमें Contracted किसानों को Good Quality वाले बीज की सप्लाई करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया करना है!

तीसरा बिल – इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को आवश्यक वस्तुओं की सूचि से हटाने का नियम है! माना जा रहा है कि बिल के लागु होने से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा! 

इसमें Electronic Bigness & Digital Payment के लिए एक सुविधाजनक Structure तैयार करने की भी बात कही गई है!

एमएसपी प्राइस लिस्ट – MSP Price List 2020-21

पिछले 4 से 5 साल के मुकाबले 2020 में MSP Price में बढ़ोतरी हुई है!

आइये अब हम यहां जान लेते हैं MSP Price List 2020-2021 में कुछ फसलों के क्या MSP Rate हैं – 

S. NO. Crops Name Year 2020-2021
1.धान 1888
2.गेहूं 1975 
4.ज्वार 2640 
5.बाजरा 2150 
6.मक्का 1850
7.रागी 3295
8.अरहर 6000
9.मूंग 7196
10.उड़द 6000
11.कॉटन 5825
12.मूंगफली 5275
13.सूरजमुखी के बीज5885
14.मसूर 5100
15.जूट 4225
16.जौ1600
MSP Full Form in Hindi

एमएसपी के फायदे क्या हैं – MSP Benefits in Hindi

अब हम जान लेते हैं MSP के क्या Benefits हैं – 

  • किसी भी समय अगर देश भर में किसी भी फसल का दाम गिरता है! तो किसान को तय MSP Rate के अनुसार ही फसलों की कीमत मिलती है!
  • MSP के अनुसार किसान सरकारी मंडी में फसल बेचता है तो वह बिचौलियों के चंगुल में नहीं आता है! क्योंकि कोई भी बिचौलिया अपने कमीशन की पहले सोचेगा और किसान का भला बाद में!  
  • हर वर्ष भारत सरकार फसलों में मिलने वाली एमएसपी का आंकलन करती है और तय MSP को बढाती है! जिससे किसानों की आय में इजाफा हो सके! 
  • सरकार MSP के आंकलन के साथ साथ फसलों की बिमा, खाद वितरण और भंडारण पर भी विशेष ध्यान देती है! 
  • किसी भी फसल का किसी राज्य में अधिक पैदावार होने से सरकार खुद किसानों की फसलों को तय MSP Rate पर खरीदती है! जिससे किसानों को फसल बेचने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी होती है! 

क्या नए कृषि कानून लागू हो चुके हैं? 

फ़िलहाल नए कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगायी है! सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसानों और सरकार के बिच बातचीत हो और कृषि कानूनों को देश की 130 करोड़ जनता को भी यह कानून समझाया जाये! इससे पहले 4 लोगों की एक कमेटी सुप्रीम कोर्ट को अपना ब्यौरा दे चुकी है! 

क्या सरकार एमएसपी पर कानून बनाने जा रही है? 

फ़िलहाल नए कृषि कानून केंद्र सरकार ने वापस ले लिए हैं! लम्बे समय से किसान आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक एमएसपी गारंटी पर कोई कानून नहीं बनता तब तक आंदोलन चलता रहेगा! नवम्बर 2021 के अंत में मानसून संसद स्तर शुरू होने वाला है! अब सबकी निगाहें इसी बात पर टिकी हैं की सरकार संसद में नये कृषि कानूनों को रद्द करके क्या एमएसपी गारंटी पर कोई कानून बनाएगी या नहीं! 

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निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस हिंदी ब्लॉग में हमने MSP Full Form in Hindi, MSP Kya Hai, एमएसपी की शुरुआत कब हुई (MSP ki Shuruaat kab hui) , एमएसपी का निर्धारण कैसे किया जाता है! MSP के Rate कौन तय करता है? नए कृषि बिल क्या है – Naye krishi bill kya hai. के बारे में जानकारी प्राप्त की!

हमने जाना MSP का निर्धारण कैसे किया जाता है! MSP के Rate कौन तय करता है (MSP Price List 2020-21)

हम उम्मीद करते है की इस आर्टिकल (MSP Kya Hai) को पढ़कर आपको एमएसपी के बारे में विस्तार से जानने को मिला होगा! आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी, हमें कमेंट सेशन में जरूर बताये! पोस्ट को अपना एक लाइक जरूर दें! और इस पोस्ट को अपने Social Side (Facebook, Instagram और WhatsApp) में Share जरूर करें! 

हमारी यह पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों का ख्याल रखें!

 

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