नमस्कार दोस्तों, आज के इस हिंदी लेख में हम हिंदी व्याकरण में समास क्या होता है? समास के कितने भेद होते हैं? (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain) और समास के सभी भेदों के बारे में विस्तार से पढने वाले है!

जिस प्रकार इंग्लिश को सिखने के लिए ग्रामर की जरुरत होती है वैसे ही शुद्ध हिंदी सिखने और पढने के लिए हमे व्याकरण का ज्ञान होना आवश्यक होता है! व्याकरण, शुद्ध हिंदी भाषा शुद्ध रूप में लिखने और बोलने के संबधित नियमो का ज्ञान होता है!

तो बिना किसी विलम्ब के इस हिंदी आर्टिकल कि शुरुआत करते है और हिंदी व्याकरण में समास क्या होता है? समास के कितने भेद होते हैं? (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain और समास के सभी भेदों के बारे में एक एक करके विस्तारपूर्वक जानते है!

samas ke kitne bhed hote hain

समास क्या होता है – Samas Kya Hota Hai

Samas Kya Hai: समास का शाब्दिक अर्थ संछेप यानी की संक्षिप्त होता है! हिंदी व्याकरण में जब दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर एक नया और सार्थक शब्द बनता है जिसका अपना एक अर्थ होता है, को समास कहते है!

समास के कितने भेद होते हैं – Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain

समास के मुख्यता 6 भेद होते हैं? अर्थात व्याकरण में समास 6 निम्नलिखित प्रकार के होते है!

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. बहुव्रीहि समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद समास
  6. कर्मधारय समास

1. अव्ययीभाव समास

समास के सबसे पहले भेद यानी की अव्ययीभाव समास में पहला पद अर्थात पहला शब्द प्रमुख होता है! इसे पूर्वपद प्रधान समास भी कहते है! मुख्यता 2 शब्दों को मिलाकर सामासिक शब्द बनता है और इसमें पहला शब्द मुख्य होता है!

अव्ययीभाव समास का प्रथम पद उपसर्ग होता है!

अव्ययीभाव समास के उदाहरण

निम्नलिखित रूप से अव्ययीभाव समास के उदाहरण है!

  • सूर्य + उदय = सूर्योदय
  • प्रति + दिन = प्रतिदिन
  • यथा + संभव = यथासंभव
  • प्रति + रूप = प्रतिरूप
  • अनु + रूप = अनुरूप

2. तत्पुरुष समास

तत्पुरुष समास वह समास होता है जिसका अंतिम शब्द प्रमुख होता है! इस समास में प्रथम पद विशेषण होता है और उत्तरपद की प्रधानता होती है! यह समास अव्ययीभाव समास के बिलकुल होता है

उदाहरण के लिए जलाभिषेक का विग्रह जल से अभिषेक है और इस विग्रह पद में पहला पद यानी की जल विशेषण है और दूसरा पद अभिषेकउतर पद है!

तत्पुरुष समास के भेद

तत्पुरुष समास के मुख्यता 6 उप भेद होते हैं!

  1. कर्म तत्पुरुष
  2. करण तत्पुरुष
  3. संप्रदान तत्पुरुष
  4. अपादान तत्पुरुष
  5. संबंध तत्पुरुष
  6. अधिकरण तत्पुरुष

तत्पुरुष समास के उदाहरण

तत्पुरुष समास के उदाहरण निम्नलिखित रूप से है!

  • दिनचर्या: दिन की चर्या
  • भारतरत्न: भारत का रत्न
  • सेनापति: सेना का पति
  • कठफोड़वा: कांठ को फ़ोड़ने वाला
  • जलाभिषेक: जल से अभिषेक
  • प्रेमसागर: प्रेम का सागर
  • भिक्षाटन : भिक्षा के लिए ब्राह्मण

3. बहुव्रीहि समास

बहुव्रीहि समास वह समास होता है जिसमे कोई भी पद प्रधान नहीं होता है! अर्थात दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद को दर्शाते हैं! 

उदाहरण के लिए घनश्याम का विग्रह घन जैसा श्याम है होता है! यहा पर दो शब्द मतलब की घन और श्यामदोनों की प्रधानता समान है और ये दोनों एक तीसरे शब्द मतलब की घनश्याम यानी की कृष्ण की ओर संकेत करते है!

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

बहुव्रीहि समास के उदाहरण निम्नलिखित रूप से है!

  • गजानन: गज का है आनन जिसका अर्थात गणेश
  • चक्रपाणि: चक्र है पाणी में जिसके अर्थात विष्णु
  • चतुर्भुज: चार है भुजाएं जिसकीअर्थात विष्णु
  • त्रिलोचन: तीन है लोचन जिसके अर्थात शिव
  • गिरिधर: गिरि को धारण करने वाले अर्थात् श्रीकृष्ण
  • नीलकण्ठ: नीला कण्ठ है जिनका अर्थात् शिव

4. द्विगु समास

वह समास होता है जिसमे पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है द्विगु समास कहलाता है! यानी की द्विगु समास में पहले पद अर्थात पूर्वपद से संख्या होने का पता चलता है!

द्विगु समास के उदाहरण

द्विगु समास के उदाहरण निम्नलिखित है!

चतुर्वेद  :   चार वेदों का समाहार
शताब्दी :   सौ वर्षों का समूह
दोपहर  :   दोपहर का समूह
अठन्नी :    आठ आनों का समूह
चौराहा:    चार राहों का समूह
पंचमढ़ी:   पांच मणियों का समूह
त्रिभुवन:    तीन भुवनों का समूह
सतसई:    सात सौ दोहों का समूह
चवन्नी:      चार आनों का समूह
सप्तदीप:  सात दीपों का समूह
अष्टधातु:   आठ धातुओं का समाहार

5. द्वंद समास

द्वंद समास उस समास को कहा जाता है जिसमे पहला और दूसरा पद दोनों प्रधान हो! यानी की इस समास में पहला और दूसरा दोनों पद मुख्य भूमिका में होते है!

उदाहरण के लिए आगपानी का विग्रह आग और पानी है और इस विग्रह पद में पहला पद यानी की आग और दूसरा पद पानी दोनों प्रमुख है!

द्वंद समास के इन दोनों पदों के बिच में और, या, अथवा, एवं, तथा में से कोई एक मौजूद होता है!

द्वंद समास के उपभेद

द्वंद समास के तीन उपभेद होते हैं!

  1. इत्येत्तर द्वंद समास
  2. समाहार द्वंद समास
  3. वैकल्पिक द्वंद समास

द्वंद समास के उदाहरण

द्वंद समास के उदाहरण निम्नलिखित है!

  • पाप – पुण्य = पाप या पुण्य
  • ऊंच – नीच = ऊंच या नीचे
  • कृष्णार्जुन = कृष्ण और अर्जुन
  • आग – पानी = आग और पानी
  • माता- पिता = माता और पिता
  • छब्बीस = छः और बीस
  • गुण – दोष = गुण और दोष

6. कर्मधारय समास

कर्मधारय समास वह समास होता है जिसमे समास पदों के पहला और दूसरा पद यानी कि सभी पद प्रधान और विशेष्य हो! 

सरल शब्दों में जिस समस्त पद का उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान – उपमेय तथा विशेषण -विशेष्य का संबंध हो वह कर्मधारय समास कहलाता है!

कर्मधारय समास के चार प्रकार होते हैं!

  1. विशेषण पूर्वपद
  2. विशेष्य पूर्वपद
  3. विशेषणोभय पद
  4. विशेष्योभय  पद

कर्मधारय समास के उदाहरण

कर्मधारय समास के उदाहरण निम्नलिखित है!

  • चंद्रबदन – चंद्र के समान मुख
  • प्राणप्रिय – प्राणों से प्रिय
  • चरणकमल – चरण के समान कमल
  • विद्यारत्न – विद्या ही रत्न है
  • महाकाव्य – महान काव्य
  • दुर्जन – दुष्ट है जो जन
  • मृगनयनी – मृग के समान नयन
  • विद्यारत्न – विद्या ही रत्न है
  • नीलकमल – नीला कमल
  • महात्मा – महान है जो आत्मा
  • कनकलता – कनक की सी लता
  • चन्द्रमुख – चन्द्रमा के समान है
  • क्रोधाग्नि – क्रोध रूपी अग्नि

निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस हिंदी आर्टिकल में हमने समास क्या होता है? समास के कितने भेद होते हैं? (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain) और समास के सभी भेदों के बारे में में विस्तार से जाना!

उम्मीद करते है हमारी यह पोस्ट (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain) से आप सभी को बहुत कुछ जानने को मिला होगा! यह कोर्स आज के समय में सबसे लोकप्रिय कोर्स माना जाने लगा है! पोस्ट को लाइक जरूर करें और सोशल मिडिया पर इस प्रकार की जानकारियों को शेयर अवश्य करें!

हमारी यह पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों का ख्याल रखें!

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