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Hello दोस्तों, आज के इस हिंदी लेख में हम हिंदी व्याकरण में क्रिया के कितने भेद होते हैं? (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hain) क्रिया किसे कहते हैं? और क्रिया की परिभाषा क्या होती है? विस्तार से पढने वाले है!

व्याकरण, हिंदी भाषा को शुद्ध रूप में लिखने और बोलने के संबधित नियमो का सम्पूर्ण ज्ञान होता है!

जिस प्रकार अंग्रेजी में बोलने और लिखना सिखने के लिए ग्रामर की जरुरत होती है वैसे ही शुद्ध हिंदी सिखने और पढने के लिए हमे हिंदी व्याकरण का ज्ञान होना आवश्यक होता है!

तो बिना किसी देरी के इस हिंदी आर्टिकल को शुरू करते है और क्रिया के कितने भेद होते हैं? (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hai) हिंदी व्याकरण में क्रिया किसे कहते हैं? क्रिया की परिभाषा और क्रिया के सभी भेदों के बारे में एक एक करके विस्तारपूर्वक जानते है!

Kriya Ke Kitne Bhed Hote hai

आज के इस आर्टिकल में हमें क्रिया के कितने भेद होते हैं? जानने से पहले क्रिया क्या होती है? अथवा और क्रिया किसे कहते हैं? के बारे में जानना आवश्यक होता है! 

विषय - सूची

क्रिया किसे कहते हैं? (Kriya Kise Kahte Hai)

क्रिया की परिभाषा: वे शब्द जो किसी कार्य को करने अथवा होने का बोध कराते है! वे क्रिया कहलाते है! और किसी भी वाक्य में जिस शब्द से किसी कार्य यानी कि काम के बारे में पता चलता हो वह शब्द क्रिया होता है।

क्रिया के कितने भेद होते हैं (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hain)

सामान्यतः क्रिया के दो भेद होते है! अकर्मक और सकर्मक! लेकिन विस्तार पूर्वक देखा जाये तो कर्म के आधार पर, रचना के आधार पर और प्रयोग के आधार पर क्रिया के भेद अलग अलग होते है!

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद

  1. अकर्मक क्रिया
  2. सकर्मक क्रिया

1. अकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

अकर्मक क्रिया वह क्रिया होती है जिसके साथ कर्म नहीं होता है! अर्थात जहाँ पर क्रिया के व्यापार का फल कर्ता पर पड़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं!

उदाहरण: आना, जाना, हंसना, रोना, सोना और जगना इत्यादि!

राम आ रहा है! या फिर रमेश रो रहा है! यहां पर रोना और आना तो क्रिया है लेकिन इस क्रिया के साथ कोई कर्म नहीं जुड़ा है! इसलिये इस प्रकार क्रिया अकर्मक क्रिया कही जाती है!

अकर्मक क्रिया के उदाहरण (Akarmak Kriya Ke Udaharan)

युवती रो रही हैं!
सोनी हंसती है!
राम खाता है!
बच्चे रोते है!
वह सोती है!

अकर्मक क्रिया कब सकर्मक क्रिया बन जाती है?

कुछ अकर्मक क्रियाओं में जब प्रत्यय जुड़ जाता है तो इस प्रकार की क्रियाये सकर्मक क्रिया बन जाती है!  

उदाहरण: हंसना से हंसाना, रोना से रूलाना और टहलना से टहलाना इत्यादि!

2. सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

सकर्मक का शाब्दिक अर्थ है कर्म के साथ यानी की जिसके साथ कर्म हो! अर्थात जिस कार्य को करने के लिए कर्त्ता को छोड़कर कर्म पर बल पड़ता है! अथवा जिस क्रिया के साथ कर्म का होना आवश्यक है उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं!

सकर्मक क्रिया के उदाहरण (Sakarmak Kriya Ke Udaharan)

रमेश फल खा रहा है
लोग क्रिकेट खेल रहे हैं
सोनिया गाना गा रही है
कृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं
राहुल एक किताब लिख रहा है!

सकर्मक क्रिया के भेद

सकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं?

  1. एककर्मक क्रिया
  2. द्विकर्मक क्रिया
1. एककर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिन सकर्मक क्रियाओं में एक ही कर्म होता है, उसे एककर्मक क्रिया कहते हैं

2. द्विकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया के साथ दो कर्म आते है, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते है! 

उदाहरण: अध्यापक बच्चों को सामान्य ज्ञान पढ़ा रहे हैं! इस वाक्य में पढ़ाना क्रिया के साथ दो कर्म आए हैं- बच्चों और सामान्य ज्ञान!

रचना के आधार पर क्रिया के भेद

  1. संयुक्त क्रिया
  2. प्रेरणार्थक क्रिया
  3. नामधातु क्रिया
  4. कृदंत क्रिया

1. संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

दो या दो अधिक धातुओं के मेल से बननेवाली क्रिया को संयुक्त है। ऐसी क्रिया जो किन्ही दो क्रियाओं के मिलने से बनती है, वह सयुंक्त क्रिया कहलाती है। जैसे- पढ़ लिया, बोल दिया, खा लिया आदि ।

2. प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं?

जब कर्ता किसी काम को खुद न करके किसी दूसरे को इसके लिए प्रेरित करता है, तो तब इस प्रकार की क्रिया प्रेरणार्थक क्रिया कहलाती है!

उदाहरण: लिखवाना, जुतवाना, करवाना इत्यादि!

यहां पर लिखवाना मतलब कर्ता खुद ना लिखकर किसी और से लिखवा रहा है! ऐसे ही जुतवाना मतलब कर्ता किसी मजदूर से खेत जुतवा रहा है!

3. नामधातु क्रिया किसे कहते हैं?

ऐसी धातु क्रिया जो क्रिया को छोड़कर किन्ही अन्य शब्दों जैसे संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि से बनती है, वह नामधातु क्रिया कहते हैं!

उदाहरण: अपनाना, बतियाना आदि!

4. कृदंत क्रिया किसे कहते हैं?

जब किसी क्रिया में प्रत्यय जोड़कर उसका नया क्रिया रूप बनाया जाए, तब वह क्रिया कृदंत क्रिया कहलाती है!

उदाहरण: अदौड़ता, भागता आदि!

प्रयोग के आधार पर क्रिया के भेद

  1. सामान्य क्रिया
  2. तात्कालिक क्रिया
  3. पूर्वकालिक क्रिया
  4. पूर्वकालिक क्रिया
  5. विधि क्रिया

1. सामान्य क्रिया किसे कहते हैं

वह किसी वाक्य में एक ही कार्य और एक ही क्रिया पद होता है तो इस तरह के क्रिया पद को सामान्य क्रिया कहते है! यह क्रिया का सामान्य रूप होता है!

सामान्य क्रिया के उदाहरण (Samanay Kriya ke Udaharan)
  • रमेश पुस्तक पढ़ता है!
  • राम खाना खाता है!
  • रोहन किताब पढ़ता है!

2. तात्कालिक क्रिया किसे कहते हैं

जब कभी पहली क्रिया के तुरंत बाद मुख्य क्रिया होती है तो पहली क्रिया को तत्कालीक क्रिया कहते है!

उदाहरण: रमेश बिस्तर पर जाते ही सो गया! यहां पर जाते ही एक तत्कालीक क्रिया है!

3. पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं

पूर्व काल में की गई क्रिया को पूर्वकालिक कहते है!

जब भी कोई कर्ता किसी प्रथम क्रिया को समाप्त करके किसी दूसरी क्रिया को शुरूकरता है तो पहले संपन्न की गई क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है! 

उदाहरण:

राम खाकर सोने लगा! यहां पर खाना खाने की क्रिया पहले पूरी की गयी है और सोने की क्रिया बाद में! इसलिए खाना खाने की क्रिया पूर्वकालिक क्रिया है!

4. विधि क्रिया किसे कहते हैं

क्रिया का वह रूप जिसमे उपदेश, ज्ञान, अनुमति, उपदेश, अनुरोध और प्रार्थनाइत्यादि का बोध होता है, उसे विधि क्रिया कहते है!

विधि क्रिया उदाहरण:

  • मेरी मदद करों!
  • भीतर आओ!
  • ऊपर जाओ!
  • यहां पर करों,
  • आओ और जाओं

ऊपर दिए गए सभी उदाहरण विधि क्रिया के रूप है!

निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस हिंदी आर्टिकल में हमने क्रिया किसे कहते हैं? क्रिया के कितने भेद होते हैं? (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hain) और कर्म के, रचना के और प्रयोग के आधार पर क्रिया के सभी भेदों के बारे में में विस्तार से जाना!

उम्मीद करते है हमारी यह पोस्ट (Kriya Ke Kitne Bhed Hote Hain) से आप सभी को बहुत कुछ जानने को मिला होगा! पोस्ट को लाइक जरूर करें और सोशल मिडिया पर इस प्रकार की जानकारियों को शेयर अवश्य करें!

हमारी यह पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों का ख्याल रखें!

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