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Tata and Ford Story in Hindi: दोस्तों, साल 1998 में जब रतन टाटा जी ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत, टाटा इंडिका को लॉन्च किया था, तब उन्होंने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आगे चलकर उन्हें फोर्ड जैसी बड़ी कंपनी के सामने बेइज्जत होना पड़ेगा!

खैर होनी को कौन टाल सकता था, और 1999 आते आते टाटा इंडिका बुरी तरह से फेल हो गई, और फिर इसके बाद रतन टाटा जी ने फैसला किया कि वे, अमेरिकन कंपनी फोर्ड को अपना कार का बिजनेस बेच देंगे!

और इस तरह से अपने कार बिजनेस को बेचने के लिए, रतन टाटा जी खुद अपनी पूरी टीम के साथ, 1999 में अमेरिका जाकर, फोर्ड कंपनी के चेयरमैन बिल फोर्ड से मिले!

TATA motors acquired fords factory

[ Tata and Ford Story in Hindi ]

लगभग तीन घंटे चली इस मीटिंग में, बिल फोर्ड ने रतन टाटा जी के कार बिजनेस को खरीदने के लिए हां तो कर दी!

लेकिन साथ में उन्होंने जाते जाते रतन टाटा जी का मजाक बनाते हुए, उनसे यह कह दिया कि “मैं तुम्हारे कार बिजनेस को खरीदकर, तुमपे बहुत बड़ा एहसान कर रहा हूं! और अगर आपको कार बिजनेस नहीं आता तो शुरु किया ही क्यु था!”

फिर क्या था, रतन टाटा जी को बिल फोर्ड की ये बात, इतनी ज्यादा बुरी लग गई कि, उन्होंने खुद अपनी तरफ से ही इस डील को कैंसल कर दिया और बिना अपनी कम्पनी बेचे वापस अपने देश भारत आ गए!

इसके बाद रतन टाटा जी ने अपने मन ही मन यह फैसला कर लिया कि वे फोर्ड से अपने इस अपमानजनक व्यवहार का बदला जरूर लेंगे!

साल 2008, जब रतन टाटा जी को अपनी बेइज्जती का बदला लिया

दोस्तों, अपने साथ दूसरे देश में हुए इस अपमानजनक व्यवहार को आखिर रतन टाटा Sir कैसे भूल जाते, बस समय का खेल था!

इसके बाद, धीरे धीरेसमय बीतता गया और रतन टाटा की टाटा मोटर्स भारतीय बाजार में ग्रो करते गया!

और फिर आया साल 2008, जब रतन टाटा जी को फ़ोर्ड से अपनी बेइज्जती का बदला लेने का सबसे पहला और अच्छा मौका मिल गया!

रतन टाटा ने ख़रीदा फोर्ड का लैंड रोवर और जैगुआर बिज़नेस 

दरअसल 2008 में आई वैश्विक मंदी की वजह से, फोर्ड कंपनी पूरी तरह से लॉस में चली गई!

और ऐसे में, अपने लॉस को रिकवर करने के लिए, फोर्ड कंपनी को अपने लैंड रोवर और जैगुआर के बिजनेस को बेचने की नौबत आ खड़ी हुई!

लेकिन दोस्तों, वैश्विक मंदी के दौरान जब कोई भी बड़ी कंपनी, फोर्ड के लैंड रोवर और जैगुआर के बिजनेस को खरीदने के लिए तैयार नहीं हुई!

तब रतन टाटा जी ने फोर्ड पर एहसान करते हुए, उनके लैंड रोवर और जैगुआर के बिजनेस को 2.3 बिलियन डॉलर में खरीद लिया!

फोर्ड के चेयरमैन ने हाथ जोड़ कहा रतन टाटा जी ने किया हम पर अहसान

और दोस्तों, यहां मजे की बात तो ये हैं की, जब रतन टाटा जी ने फोर्ड के बिजनेस को खरीदा!

तब खुद फोर्ड के चेयरमैन विलियम क्ले फोर्ड ने, Ratan Tata Sir से हाथ जोड़ कर ये कहा कि आपने हमारा ये बिजनेस खरीद कर हमपे बहुत बड़ा एहसान किया है!

वैसे दोस्तों, इसे ही बोलते हैं “रॉयल स्टाइल में बदला लेना”

अब 2008 में हुई इस डील के बाद, सबको यही लगा था कि रतन टाटा जी ने, फोर्ड से अपना बदला ले लिया है, लेकिन असल में बदला लेने का ये खेल यही खत्म नहीं हुआ था!

क्यूंकि अभी हाल ही रतन टाटा जी ने इंडिया में बने Ford India के साणंद स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को बड़े ही सस्ते दामों में खरीद कर, और इस तरह से रतन टाटा सर ने पूरे वैश्विक स्तर पर यह संदेश पहुंचा दिया है कि एक भारतीय बिज़नेस में और वो भी रतन टाटा से पंगा लेना बहुत पड़ेगा महंगा!

टाटा ने ख़रीदा Ford India के साणंद स्थित प्लांट 

दरअसल दोस्तों, रतन टाटा जी ने अभी हाल ही में अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए Ford India के सानंद वाले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को 91.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 726 करोड़ रुपए में खरीद लिया है!

अब दोस्तों, यहां आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर फोर्ड एक एक करके अपने सभी इंडियन बिजनेस को बेच क्यूं रहा है?

तो दोस्तों यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि वैसे तो फोर्ड दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में से एक है, और इसका बिजनेस अमेरिका के साथ साथ और भी कई देशों में फैला हुआ है!

लेकिन इंडिया में बिजनेस कर पाना सबके बस की बात नहीं है, क्यूंकि हमारे भारतीयों की पसंद काफी अलग होती है!

ऐसे में, फोर्ड इंडियन लोगों की पसंद को समझ नहीं पाया और धीरे धीरे, एक एक करके फोर्ड की ज्यादातर गाडियां इंडिया में फेल होती चली गईं!

जिसका रिजल्ट यह हुआ कि 1995 में 2.5 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट के साथ, इंडिया में आई फोर्ड कंपनी, को पिछले दस सालों में 2 बिलियन डॉलर का लॉस हो गया!

अब इतने बड़े लॉस के बाद दोस्तों, फोर्ड कंपनी को ये अच्छी तरह से समझ में आ गया कि इंडिया में उसकी दाल नहीं गलने वाली है!

इसलिए फोर्ड कंपनी ने, सितम्बर 2021 में इंडिया में अपने बिजनेस को बंद करने का फैसला किया, और साथ ही साथ अपने लॉस को रिकवर करने के लिए, अपने गाड़ी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को बेचने की बात कही!

अब दोस्तों, फोर्ड कंपनी का इंडिया में बिजनेस बंद हो जाने की वजह से, 2 तरह के लोगों को सबसे बड़ा नुकसान हुआ!

पहले तो वे, जिन्होंने कंपनी के बंद होने के just पहले फोर्ड की गाडियां खरीदी थी, और दूसरे वे हजारों वर्कर्स जो फोर्ड के गाड़ी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में सालों से काम कर रहे थे!

फोर्ड कम्पनी अपने कस्टमर्स को 10 साल तक देगी सर्विस 

ऐसे में कंपनी ने, अपने कंस्टमर्स को तो ये आस्वश्वासन दे दिया कि वे भले ही इंडिया में ना रहें, लेकिन फिर भी वे, अपने कंस्टमर्स को 10 साल तक सर्विस देंगे!

लेकिन अब बात आती है, उन वर्कर्स की, जिन्हें मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बंद होने की वजह से काम से निकाल दिया गया था!

वर्कर्स को टाटा कम्पनी में मिलेगा परमानेंट जॉब 

हालांकि फोर्ड ने इंडिया में सिर्फ गाड़ियां बनाने का बिजनेस बंद किया था, और उनके गाड़ियों के पार्ट्स बनाने का बिजनेस अभी भी चालू था!

लेकिन इस बिजनेस के लिए, उन्हें अब उतने ज्यादा वर्कर्स की जरूरत नहीं थी, जितनी की गाडियां बनाने में जरूरत होती थी! इसलिए बहुत से वर्कर्स की नौकरी चली गई!

और क्युकी ये वर्कर है तो हमारे भारत के ही, इसलिए  यहां दोस्तों, जब रतन टाटा जी ने फोर्ड के कार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को खरीदा, तब सबकी जिंदगी बदल गई! और अब सभी वर्कर्स को टाटा कम्पनी में परमानेंट जॉब मिल गयी!

इस तरह से इस रतन टाटा जी की इस डील से टाटा मोटर्स को तो फायदा तो हुआ ही, लेकिन साथ में फोर्ड कंपनी और फोर्ड कंपनी के वर्कर्स को भी फायदा हुआ! 

अब सड़को पर केवल टाटा दौड़ेगी 

दरअसल दोस्तों, कोरोना के बाद से ही, टाटा कंपनी के Cars की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई थी, और अब तो टाटा कंपनी ने इलेक्ट्रिक कार बनाने के फील्ड में भी अपना कदम रख दिया है!

ऐसे में दोस्तों, टाटा कंपनी को अपने इंडियन कस्टमर्स की डिमांड को पूरा करने के लिए फोर्ड जैसे ही किसी बड़े कार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की सख्त जरूरत थी!

लेकिन अगर Tata Motors India, अपना खुद का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाती तो, इसमें कई सालों का वक्त, और कई हजार करोड़ रुपए लग जाते!

इसलिए रतन टाटा जी ने समझदारी दिखाते हुए, फोर्ड के 4500 करोड़ रुपए के लागत से बने हुए, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को सिर्फ 726 करोड़ में खरीद लिया!

इससे उनके करोड़ों रुपए तो बचे ही, साथ ही उनके कई सालों का समय भी बच गया! रतन टाटा जी के अकॉर्डिंग, फोर्ड के इस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट कुछ बदलाव करने के बाद, हर साल इसमें 4 लाख 20 हजार गाड़ियों को बनाया जा सकेगा!

टाटा की कार फैक्ट्री से मात्र 4.5 किलोमीटर दूर फोर्ड का सानंद मैन्युफैक्चरिंग प्लांट

इसके साथ ही दोस्तों, Tata Motors India के लिए सानंद वाले इस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को खरीदने का एक और बड़ा फायदा यह भी है कि, यह प्लांट, रतन टाटा जी के दूसरे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से सिर्फ साढ़े चार किलोमीटर दूर है!

यानी की अब रतन टाटा जी के लिए अपने एक प्लांट से दूसरे प्लांट में चीजों को पहुंचाने का खर्चा लगभग जीरो के बराबर होगा

टाटा की इस डील से फोर्ड को भी होगा कुछ फ़ायदा 

दोस्तों, यहां तक सुनने के बाद, आपको यही लग रहा होगा कि इस डील में तो सिर्फ टाटा मोटर्स और वर्कर्स का ही फायदा है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है!

इस डील में रतन टाटा जी के साथ साथ फोर्ड कम्पनी को भी फायदा कैसे हुआ? तो चलिए जानते है!

दरअसल रतन टाटा और फोर्ड के बिच की एक डील से इंडियन मार्केट में अपना 2 बिलियन का लॉस करने के बाद, अगर फोर्ड कंपनी को अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए 726 करोड़ रुपए मिल रहे हैं! तो यह उनके लिए एक बहुत बड़ी लॉस रिकवरी है!

इसके साथ ही, रतन टाटा जी ने यह वादा भी किया है कि, वे फोर्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में काम करने वाले पुराने सभी वर्कर्स को भी काम देंगे! इससे फोर्ड कंपनी की इंडियन मार्केट में इज्जत खराब होने से बच गई और साथ ही सभी वर्कर्स का भी भला हो गया!

अब फोर्ड कम्पनी देगी रतन टाटा को किराया 

और तो और दोस्तों, अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को बेचने के बाद, फोर्ड कंपनी ने गाड़ी के पार्ट्स बनाने वाले बिजनेस को चालू रखने के लिए, इस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के एक छोटे से हिस्से को टाटा कंपनी से किराए पर ले लिया है!

यानी की इसे दूसरे शब्दों में कहें, तो किस्मत का पहिया ऐसा घुमा कि जिस रतन टाटा का फोर्ड कंपनी ने कभी मजाक बनाया था, वह आज रतन टाटा का किरायेदार बन चुका है!

Final Words (अंतिम शब्द)

खैर दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या रतन टाटा जी ने फोर्ड से बदला लेने के लिए उनका मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खरीदा है या फिर एक समझदार बिजनेसमैन की तरह, अपने बिजनेस को ग्रो करने के लिए फोर्ड के प्लांट को खरीदा है!

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